अथर्ववेद 1.3.5 मन्त्र: मूत्रमोचन, शर का प्रयोग और प्राचीन भारतीय चिकित्सा-दृष्टि
अथर्ववेद में मानव जीवन, स्वास्थ्य, रोग-निवारण और प्रकृति से संबंधित अनेक मन्त्र मिलते हैं। शौनक शाखा के अथर्ववेद के प्रथम काण्ड के तृतीय सूक्त का पाँचवाँ मन्त्र विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि इसमें सूर्य का उल्लेख, शरीर के कल्याण की कामना और मूत्र के निर्बाध निष्कासन का वर्णन एक साथ मिलता है। इस सूक्त
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