अथर्ववेद १.२.१
वैदिक विज्ञान एवं जीवन-दर्शन: ‘विद्मा शरस्य’ अथर्ववेद काण्ड १, सूक्त २, मन्त्र १ अथर्ववेद का यह मन्त्र प्रकृति, ऊर्जा, पृथ्वी और मानव-निर्मित साधनों के पारस्परिक संबंध पर एक गहन दृष्टि प्रस्तुत करता है। मन्त्र में ‘शर’ के पिता के रूप में पर्जन्य और माता के रूप में पृथिवी का उल्लेख मिलता है। सायणभाष्य की दृष्टि […]





