1. प्रस्तावना

संस्कृत वर्णमाला केवल वर्णों की एक सूची नहीं है। इसकी रचना उच्चारण-स्थान, उच्चारण-प्रयत्न और ध्वनि के स्वरूप को ध्यान में रखकर की गई है। इसलिए संस्कृत वर्णमाला को व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक वर्ण-व्यवस्था के रूप में समझा जाता है।

2. स्वर और व्यञ्जन

वर्णों का मुख्यतः दो वर्गों में विभाजन किया जाता है:

(1) स्वर
(2) व्यञ्जन

स्वर

जिन वर्णों के उच्चारण में वायु को मुख के भीतर किसी स्थान पर पूर्ण अवरोध का सामना नहीं करना पड़ता, वे स्वर कहलाते हैं।

स्वरों में मुख्यतः ह्रस्व, दीर्घ और प्लुत मात्रा का विचार किया जाता है।

उदाहरण:

  • अ — ह्रस्व
  • आ — दीर्घ
  • इ — ह्रस्व
  • ई — दीर्घ
  • उ — ह्रस्व
  • ऊ — दीर्घ

इसके अतिरिक्त ऋ, ॠ, ऌ आदि स्वर भी शास्त्रीय वर्ण-व्यवस्था में वर्णित हैं।

3. व्यञ्जन

व्यञ्जनों का उच्चारण करते समय मुख के किसी न किसी भाग में वायु के प्रवाह पर विशेष प्रकार का अवरोध या स्पर्श होता है।

व्यञ्जनों को मुख्यतः निम्न वर्गों में व्यवस्थित किया जाता है:

वर्ग वर्ण
कवर्ग क ख ग घ ङ
चवर्ग च छ ज झ ञ
टवर्ग ट ठ ड ढ ण
तवर्ग त थ द ध न
पवर्ग प फ ब भ म

 

इसके अतिरिक्त:

अन्तःस्थ:
य, र, ल, व

ऊष्म:
श, ष, स, ह

4. वर्गों की वैज्ञानिक व्यवस्था

पाँचों वर्गों का क्रम उच्चारण-स्थान के आधार पर समझा जा सकता है:

कण्ठ → तालु → मूर्धा → दन्त → ओष्ठ

इसी क्रम से:

क-वर्ग → च-वर्ग → ट-वर्ग → त-वर्ग → प-वर्ग

इस व्यवस्था को समझने से विद्यार्थी केवल वर्णों को रटने के बजाय उनके उच्चारण-स्थान और ध्वनि-प्रक्रिया को समझ सकता है।

5. प्रत्येक वर्ग के पाँच वर्ण

प्रत्येक वर्ग में पाँच वर्ण होते हैं। उदाहरण के लिए कवर्ग:

क — ख — ग — घ — ङ

इनमें उच्चारण के प्रयत्न और घोष/अघोष आदि में क्रमिक अंतर पाया जाता है।

इसी प्रकार:

च — छ — ज — झ — ञ

ट — ठ — ड — ढ — ण

त — थ — द — ध — न

प — फ — ब — भ — म

6. अयोगवाह

संस्कृत वर्ण-व्यवस्था में कुछ ध्वनि-चिह्न ऐसे हैं जिन्हें पारम्परिक रूप से अयोगवाह कहा जाता है। इनमें अनुस्वार, विसर्ग आदि का विशेष उल्लेख मिलता है।

इनका शुद्ध उच्चारण संस्कृत तथा वैदिक पाठ में महत्वपूर्ण है। इनके विषय में आगे अलग पाठ में विस्तार से अध्ययन किया जाएगा।

7. इस पाठ से हम क्या सीखेंगे?

इस पाठ के बाद विद्यार्थी:

  • स्वर और व्यञ्जन में अंतर समझेंगे।
  • पाँच व्यञ्जन-वर्गों को पहचानेंगे।
  • अन्तःस्थ और ऊष्म वर्णों को पहचानेंगे।
  • वर्णमाला के वैज्ञानिक क्रम को समझेंगे।
  • उच्चारण-स्थान के आधार पर वर्णों का वर्गीकरण कर सकेंगे।

8. अभ्यास

प्रश्न 1: संस्कृत वर्णों के दो मुख्य वर्ग कौन से हैं?

प्रश्न 2: पाँच व्यञ्जन-वर्गों के नाम लिखिए।

प्रश्न 3: प्रत्येक वर्ग के पाँच वर्ण लिखिए।

प्रश्न 4: अन्तःस्थ वर्ण कौन-कौन से हैं?

प्रश्न 5: ऊष्म वर्ण कौन-कौन से हैं?

अभ्यास कार्य:
बिना देखे पाँचों वर्गों का उच्चारण करें:

क ख ग घ ङ
च छ ज झ ञ
ट ठ ड ढ ण
त थ द ध न
प फ ब भ म

इसके बाद विद्यार्थी प्रत्येक वर्ग के उच्चारण-स्थान को याद करें।