1. प्रस्तावना

संस्कृत वर्णव्यवस्था में कुछ ध्वनियों के उच्चारण में नासिका की विशेष भूमिका होती है। इसके अतिरिक्त विसर्ग, अनुस्वार आदि को पारम्परिक व्याकरण में विशेष रूप से समझाया जाता है।

इस पाठ में हम पञ्चम वर्ण, अनुस्वार, विसर्ग तथा प्रमुख अयोगवाहों का परिचय प्राप्त करेंगे।

2. पञ्चम वर्ण

पाँचों व्यञ्जन-वर्गों का अंतिम वर्ण पञ्चम वर्ण कहलाता है।

वर्ग पञ्चम वर्ण उच्चारण-स्थान
कवर्ग कण्ठ
चवर्ग तालु
टवर्ग मूर्धा
तवर्ग दन्त
पवर्ग ओष्ठ

इन पाँचों के उच्चारण में उनके अपने उच्चारण-स्थान के साथ नासिका की भी भूमिका होती है।

शास्त्रीय सूत्र:

ङञणनमाः स्वस्थाननासिकास्थानाः।

अर्थात् ङ, ञ, ण, न और म अपने-अपने स्थान तथा नासिका से सम्बन्धित होकर उच्चरित होते हैं।

3. अनुस्वार

अनुस्वार का चिह्न है:

अनुस्वार का प्रयोग संस्कृत शब्दों एवं मन्त्रों में अनेक स्थानों पर मिलता है।

उदाहरण:

संस्कृतम्
अंशः
गङ्गा

अनुस्वार के उच्चारण को केवल हिन्दी के सामान्य “ं” उच्चारण के समान मान लेना उचित नहीं है। उसके वास्तविक उच्चारण को आगामी वर्ण तथा सम्बन्धित उच्चारण-स्थान के संदर्भ में समझना आवश्यक है।

इसका विस्तृत अभ्यास आगे किया जाएगा।

4. विसर्ग

विसर्ग का चिह्न है:

उदाहरण:

रामः
हरिः
देवः

विसर्ग का सम्बन्ध कण्ठीय उच्चारण से माना जाता है और वैदिक तथा संस्कृत पाठ में इसका स्पष्ट उच्चारण आवश्यक है।

विसर्ग को सामान्यतः केवल “ह” की तरह बोलना उचित नहीं है। इसके उच्चारण की विशिष्ट प्रक्रिया का अभ्यास आवश्यक है।

5. जिह्वामूलीय और उपध्मानीय

शास्त्रीय वर्ण-व्यवस्था में विसर्ग के कुछ विशेष रूपों का भी उल्लेख मिलता है।

जिह्वामूलीय — कण्ठ्य वर्णों से पहले विसर्ग के विशेष उच्चारण का रूप।

उपध्मानीय — प-वर्ग से पहले विसर्ग के विशेष उच्चारण का रूप।

इनका प्रयोग मुख्यतः शास्त्रीय एवं वैदिक पाठ-परम्पराओं में समझा जाता है।

6. अयोगवाह

परम्परागत संस्कृत वर्ण-व्यवस्था में कुछ ध्वनि-तत्त्वों को अयोगवाह कहा जाता है। इनके अन्तर्गत विभिन्न परम्पराओं में अनुस्वार, विसर्ग तथा अन्य विशेष ध्वनि-रूपों का वर्णन मिलता है।

इसलिए अयोगवाहों का अध्ययन करते समय ग्रन्थ-विशेष की परम्परा और पाठ को ध्यान में रखना आवश्यक है।

7. उच्चारण अभ्यास

धीरे-धीरे निम्न शब्दों का उच्चारण करें:

गङ्गा
पञ्च
अण्डम्
सन्तः
सम्पूर्णम्

अब विसर्ग वाले शब्द:

रामः
देवः
हरिः

उच्चारण करते समय ध्यान दें कि:

  • नासिक्य ध्वनि स्पष्ट हो।
  • विसर्ग का उच्चारण लुप्त न हो।
  • अनुस्वार को अनावश्यक रूप से “न” या “म” में न बदलें।
  • शब्द के अगले वर्ण के अनुसार ध्वनि पर ध्यान दें।

8. अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1: पञ्चम वर्ण किसे कहते हैं?

प्रश्न 2: पाँचों पञ्चम वर्ण लिखिए।

प्रश्न 3: अनुस्वार का चिह्न क्या है?

प्रश्न 4: विसर्ग का चिह्न क्या है?

प्रश्न 5: जिह्वामूलीय और उपध्मानीय किससे सम्बन्धित हैं?

प्रश्न 6: नासिक्य उच्चारण में नासिका की क्या भूमिका है?

अभ्यास कार्य

निम्न शब्दों का स्पष्ट उच्चारण करें और प्रत्येक में नासिक्य अथवा विसर्ग की पहचान करें:

गङ्गा — पञ्च — अण्डम् — सन्तः — रामः — देवः