Daily Rigved

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ऋग्वेद मन्त्र १.३५.२ : सविता देवता (सूर्य) की महिमा

आध्यात्मिक, पारंपरिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्राचीन वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का एक विचारोत्तेजक समन्वय ऋग्वेद के प्रथम मण्डल के पैंतीसवें सूक्त का द्वितीय मन्त्र सविता देवता के स्वरूप, गति, प्रकाश तथा समस्त भुवनों के साथ उनके संबंध का अत्यंत सुंदर वर्णन प्रस्तुत करता है। इस मन्त्र में सविता को ज्योतिर्मय रथ से गमन करने

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ऋग्वेद 1.35.1 — उद् उत्यम् जातवेदसं | Daily Rigved

परिचय-गायत्री मन्त्र के देवता सविता हैं। इस सूक्त में सविता के साथ अग्नि, मित्र-वरुण और रात्रि का भी आह्वान किया गया है। आगे के मन्त्रों में सविता के स्वरूप, गति, प्रकाश और कर्म से सम्बन्धित विभिन्न पक्षों का विवेचन मिलता है। मन्त्र — ह्वया॑म्य॒ग्निं प्र॑थ॒मं स्व॒स्तये॒ ह्वया॑मि मि॒त्रावरु॑णावि॒हाव॑से ।ह्वया॑मि॒ रात्रीं॒ जग॑तो नि॒वेश॑नीं॒ ह्वया॑मि दे॒वं स॑वि॒तार॑मू॒तये॑

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chatgpt image aug 13, 2026, 08 23 41 pm

ऋग्वेद 1.1.1 — अग्निमीळे पुरोहितं | Daily Rigved Day 1

🔱 ऋग्वेद मंत्र अ॒ग्निमी॑ळे पु॒रोहि॑तं य॒ज्ञस्य॑ दे॒वमृ॒त्विज॑म्। होता॑रं रत्न॒धात॑मम्॥ मैं पुरोहित अग्नि की स्तुति करता हूँ, जो यज्ञ के होता हैं, ऋत्विज् हैं, यज्ञ के रत्नस्वरूप फल देने वाले हैं। 🕉️ भावार्थ एवं व्याख्या पद अर्थ अग्निम् अग्नि को ईळे मैं स्तुति करता हूँ पुरोहितम् आगे स्थापित/पुरोहित रूप से स्थित यज्ञस्य यज्ञ के देवम् देव

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