ऋग्वेद मन्त्र 1.2.8
मित्र और वरुण: ऋत, सत्य तथा सृष्टि के महान् यज्ञ का वैदिक विवेचन इस मन्त्र में मित्र और वरुण को ऋत अर्थात् सत्य, नियम और सुव्यवस्था से सम्बद्ध शक्तियों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। आचार्य सायण के भाष्य में यज्ञ और उसके फल की व्याख्या प्रमुख है, जबकि महर्षि दयानन्द सरस्वती के भाष्य
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