निरुक्त (Nirukta) — वैदिक शब्दार्थ एवं व्युत्पत्ति

🕉️ निरुक्त (Nirukta)

वैदिक शब्दों की व्युत्पत्ति एवं अर्थ-विवेचन का शास्त्र

निरुक्त वेदाङ्गों में वैदिक शब्दों के अर्थ, उनकी व्युत्पत्ति तथा संदर्भानुसार उनके अर्थ-विवेचन से संबंधित महत्वपूर्ण शास्त्र है।

वेदों में प्रयुक्त अनेक प्राचीन एवं विशिष्ट शब्दों को समझने के लिए निरुक्त का अध्ययन विशेष उपयोगी है। निरुक्त परम्परा में यास्काचार्य का विशेष स्थान है और उनका निरुक्त इस विषय का प्रमुख प्राचीन ग्रंथ माना जाता है।

📚 निरुक्त के प्रमुख विषय

  • वैदिक शब्दों का अर्थ
  • शब्दों की व्युत्पत्ति
  • धातु एवं शब्द-संबंध
  • कठिन वैदिक शब्दों का विवेचन
  • वैदिक देवता-नामों का अर्थ-विचार
  • वैदिक मन्त्रों के प्रमुख शब्दों का अध्ययन
  • शब्द एवं अर्थ के संबंध का विवेचन

🔎 निरुक्त का महत्व

निरुक्त के अध्ययन से विद्यार्थी वैदिक मन्त्रों में प्रयुक्त महत्वपूर्ण शब्दों के अर्थ एवं उनकी व्युत्पत्ति को समझने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

यह अध्ययन वैदिक मन्त्रों के शब्दार्थ, संदर्भ और भाषाशास्त्रीय विवेचन में सहायक होता है।


📚 निरुक्त के पाठ्यक्रम

नीचे निरुक्त एवं वैदिक शब्दार्थ से संबंधित हमारे सभी उपलब्ध पाठ्यक्रम देखें।

No Data Available in this Section
No Data Available in this Section

🌿 आगे का अध्ययन

वेदाङ्ग के अन्य प्रमुख अंग:

शिक्षा • कल्प • व्याकरण • छन्द • ज्योतिष

🕉️ वेदाङ्ग के मुख्य पृष्ठ पर जाएँ

वेदाङ्ग — वेदों के षडङ्ग