वैदिक छन्द
About Course
वैदिक मन्त्र केवल शब्दों और अर्थों का समूह नहीं हैं। उनके उच्चारण, स्वर, पद-विन्यास और छन्द का भी विशेष महत्व है। छन्दः वेदाङ्गों में से एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसके माध्यम से मन्त्रों में प्रयुक्त अक्षरों, पादों तथा उनकी निश्चित व्यवस्था को समझा जाता है।
इस Basic Course में विद्यार्थियों को छन्दशास्त्र की मूल अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाया जाएगा और वैदिक मन्त्रों के उदाहरणों द्वारा अभ्यास कराया जाएगा।
🎯 Course Objectives
इस पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद विद्यार्थी:
- छन्दः का सामान्य अर्थ और उद्देश्य समझ सकेंगे।
- छन्दः को वेदाङ्ग के रूप में समझ सकेंगे।
- अक्षर, मात्रा और पाद की मूल अवधारणा समझ सकेंगे।
- लघु और गुरु की प्रारम्भिक पहचान कर सकेंगे।
- वैदिक मन्त्र के पादों को पहचान सकेंगे।
- प्रमुख वैदिक छन्दों की पहचान कर सकेंगे।
- गायत्री, उष्णिक्, अनुष्टुप्, बृहती, पङ्क्ति, त्रिष्टुप् और जगती का मूल परिचय प्राप्त करेंगे।
- मन्त्र में अक्षर-संख्या की गणना का अभ्यास करेंगे।
- सरल मन्त्रों में छन्द की पहचान करने का प्रयास कर सकेंगे।
- छन्द और मन्त्र-पाठ के संबंध को समझ सकेंगे।
Course Content
वैदिक छन्द शास्त्र: प्रमाण और प्रयोग
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पाठ 1 — छन्द क्या है?
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पाठ 2 — अक्षर, मात्रा और वैदिक अक्षर-गणना
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पाठ 3 — पाद-विभाजन और अक्षर-गणना का व्यावहारिक अभ्यास
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पाठ 4 — न्यूनाक्षर और अधिकाक्षर: निचृत्, भुरिक्, विराट् और स्वराट्
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पाठ 5 — ऋग्वेद-प्रातिशाख्य: छन्द-विचार का प्रामाणिक आधार
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पाठ 6 — सप्त प्रमुख वैदिक छन्दों का परिचय
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पाठ 7 — गायत्री छन्द का विस्तृत अध्ययन
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पाठ 8 — गायत्री मन्त्र का वास्तविक छन्दीय विश्लेषण
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पाठ 9 — उष्णिक् छन्द का विस्तृत अध्ययन
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पाठ 10 — अनुष्टुप् छन्द: वैदिक रूप से लौकिक श्लोक तक
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पाठ 11 — बृहती छन्द का विस्तृत अध्ययन
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पाठ 12 — पङ्क्ति छन्द का विस्तृत अध्ययन
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पाठ 13 — त्रिष्टुप् छन्द का विस्तृत अध्ययन
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पाठ 14 — जगती छन्द का विस्तृत अध्ययन
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पाठ 15 — अतिच्छन्दों का परिचय
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पाठ 16 — विषम पाद और मिश्रित वैदिक छन्द
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पाठ 17 — महर्षि पिङ्गल का छन्दःसूत्र और गण-व्यवस्था
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पाठ 18 — लघु, गुरु और मात्रा का विस्तृत अध्ययन
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पाठ 19 — अक्षर-गणना की शास्त्रीय विधि और छन्द-विचार
ऋग्वेद-प्रातिशाख्य और छन्द-विचार
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