☀️ ज्योतिष (Jyotiṣa)
वैदिक कालगणना एवं समय-निर्धारण का शास्त्र
ज्योतिष वेदाङ्गों में काल की गणना तथा वैदिक कर्मों के लिए समय-निर्धारण से संबंधित शास्त्र है।
प्राचीन वैदिक परम्परा में यज्ञ एवं अन्य वैदिक कर्मों के उचित समय को निर्धारित करने के लिए कालगणना का विशेष महत्व था। सूर्य, चन्द्र, नक्षत्र तथा समय की विभिन्न इकाइयों का अध्ययन इस परम्परा का महत्वपूर्ण भाग रहा है।
📚 ज्योतिष के प्रमुख विषय
- कालगणना
- तिथि
- नक्षत्र
- मास
- ऋतु
- अयन
- संवत्सर
- सूर्य एवं चन्द्र की गति
- वैदिक समय-निर्धारण
☀️ वेदाङ्ग ज्योतिष का महत्व
वेदाङ्ग ज्योतिष के अध्ययन से विद्यार्थी प्राचीन भारतीय कालगणना तथा वैदिक कर्मों के समय-निर्धारण की परम्परा को समझने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
यह अध्ययन भारतीय ज्ञान-परम्परा में समय, ऋतु, नक्षत्र और खगोलीय चक्रों की भूमिका को समझने में सहायक है।
📚 ज्योतिष के पाठ्यक्रम
नीचे वेदाङ्ग ज्योतिष एवं वैदिक कालगणना से संबंधित हमारे सभी उपलब्ध पाठ्यक्रम देखें।
🌿 आगे का अध्ययन
वेदाङ्ग के अन्य प्रमुख अंग:
शिक्षा • कल्प • व्याकरण • निरुक्त • छन्द
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वेदाङ्ग — वेदों के षडङ्ग
